कंटोला का परिचय, Kantola
केवल कुछ ही लोग इस सब्जी को कर्कोटकी के नाम से पहचान पाएंगे। वास्तविकता में, हिन्दी में कर्कोटकी को कंटोला(Kantola) कहा जाता है, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी उत्कृष्ट मानी जाती है। यह वन्ती, श्रवणदार्द, खांसी, पेट सम्बन्धी रोग, बवासीर, खुजली जैसी आम बीमारियों के उपचार में लाभप्रद होती है। इसके अतिरिक्त, यह बालों की झड़ने को कम करने के साथ-साथ उन्हें मजबूत भी बनाती है। ककोरा के लाभों के बारे में जानने से पहले, चलिए इसके बारे में विस्तृतता से जानते हैं।
कर्कोटकी या ककोरा क्या है?, What is Kantola or Kakrol?
जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है, केवल कुछ ही लोग कर्कोटकी (कांक्रोला) के नाम से इस सब्जी को पहचान पाएंगे। वास्तव में, हिंदी में कर्कोटकी को ककोरा, खेखसा, ककोड़ा भी कहा जाता है। ककोरा फलों का प्रयोग साग के रूप में किया जाता है। इसमें गाजर की तरह बहुवर्षीय जड़ होती है। इसका उपयोग मस्तिष्क संबंधी बीमारियों, रक्तार्श या खूनी बवासीर, ग्रन्थि (टेस्टीटिस) और मधुमेह (डायबिटीज) के इलाज में किया जाता है।
यहां नर और नारी फूल की लताएं अलग-अलग होती हैं। नर पुष्प की लता में फल नहीं लगते हैं, इसलिए उसे बांझ ककोड़ा (कांटोला) कहा जाता है, जबकि फल देने वाली स्त्री पुष्प की लता को ककोड़ा कहा जाता है। इसके फल मुलायम कांटों से युक्त होते हैं, जो देवदाली या धतूरे के फल की प्राकृतिक अवस्था में हरे बाहर से और सफेद रंग के अंदर से होते हैं, और पकने पर पीले और लाल रंग के होते हैं। इनके बीज परवल के बीज की तरह होते हैं।
ककोड़ा (कांटोला) प्रकृति से थोड़ा कड़वा, मधुर और गर्म तासीर वाला होता है। यह वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को शांत करने वाला, अग्निदीपन (पाचन शक्ति बढ़ाने वाला), भोजन में रुचि बढ़ाने वाला, वृष्य (लिबिडो) उत्तेजक, ग्राही (अवशोषण), रक्तपित्तहर (रक्त से पित्त को हटाने वाला) और हृद्य (हृदय के लिए उपयोगी) होता है।
इसका उपयोग कुष्ठ, हृल्लास (उल्टी), अरुचि (भोजन में रुचि कम होना), श्वास (सांस संबंधी समस्या), कास (खांसी), ज्वर (बुखार), किलास (खुजली), क्षय (कमजोरी), हिक्का, अर्श (बवासीर), गुल्म (ट्यूमर), शूल (दर्द), कृमि, सिरदर्द, हृदयरोग, पीनस (नाक संबंधी समस्या), विष और विसर्पनाशक (हर्पिज नष्ट करने वाला) में किया जाता है।
कर्कोटी का फल कड़वा और मधुर होता है। इसके अलावा, यह दीपन (पाचन), त्रिदोषशामक, दिल के रोग, अरुचि, सांस संबंधी बीमारी, कास या खांसी, ज्वर या बुखार, गुल्म, शूल या दर्द और मूत्र संबंधी रोगों में भी फायदेमंद होता है।
कर्कोटी का फूल कुष्ठ, किलास (त्वचा संबंधी रोग) और अरुचि नाशक होता है।
कर्कोटी का कंद (बल्ब) सिरदर्द नाशक होता है।
इसके पत्ते रुचिकारक, वीर्यवर्धक, त्रिदोषों को शांत करने वाले, कृमि, ज्वर, क्षय, श्वास, कास, हिक्का और अर्श नाशक माने जाते हैं।
अन्य भाषाओं में ककोरा या ककोड़ा के नाम, Name of Kantola in Different Languages
काकरोल का वानास्पतिक नाम Momordica dioica Roxb. ex Willd. (मोमोर्डिका डायोइका) है। ककोरा कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) कुल का है और इसको अंग्रेजी में Spine gourd (स्पाईन गॉर्ड) कहते हैं। भारत के विभिन्न प्रांतों में ककोरा को विभिन्न नामों से पुकारा जाता है।
- English- Spine gourd
- Sanskrit-कर्कोटकी, कर्कोटक,पीतपुष्पा और महाजाली;
- Hindi-खेकसा,खेखसा, ककोड़ा, ककोरा;
- Assamese-बटकरीला (Batkarila);
- Kannada-माडहागलकायी (Madhagalkayi);
- Gujrati-कंटोला (Kantola), कन्कोडा (Kankoda);
- Telugu-आगाकर (Aagakara);
- Tamil-एगारवल्लि (Egarvalli);
- Bengali-बोनकरेला (Bonkarela), कंक्रोल (Kankrol);
- Nepali-चटेल (Chatel), कन्न (Kann), करलीकाई (Karalikayi), युलुपावी (Yulupavi), पलुपपाकाई (Paluppakayi);
- Punjabi-धारकरेला (Dharkarela), किरर (Kirar);
- Marathi-कर्टोली (Kartoli), कंटोलें (Kantole);
- Malayalam-वेमपवल (Vempawal)।
कंटोला के फायदे, Benefits and Uses of Kantola
काकोरा (Kantola) विशेष रूप से करेले की तरह दिखाई देता है, लेकिन स्वाद में पूरी तरह से अलग होता है। इस छोटे सब्जी में आयुर्वेदिक गुणों की अनगिनत विशेषताएं होती हैं। कंटोला आयुर्वेद में विभिन्न रोगों के इलाज के लिए उपयोग में लाया जाता है, लेकिन इसके उपयोग का तरीका और किस-किस रोग के लिए फायदेमंद है, इसके बारे में सही जानकारी लेते हैं।
सिरदर्द में उपयोगी ककोरा का सेवन, Use of Kantola in Headache
वर्तमान में, सिरदर्द हर दो दिन में किसी न किसी कारण से एक परेशानी का कारक बन रहा है। सिरदर्द के कारण, किसी भी कार्य को सावधानीपूर्वक करना मुश्किल हो जाता है। कांक्रोला की सब्जी का सेवन सिरदर्द से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करता है।
- 1-2 बूंद कांक्रोला के पत्ते के रस को नाक से लेने से सिरदर्द से मुक्ति मिलती है।
- कांक्रोला की जड़ को गाय के घी में पकाकर, उसे छानकर, 1-2 बूंद नाक में टपकाने से माइग्रेन या आधासीसी के दर्द में लाभ होता है।
- कांक्रोला की जड़ को काली मिर्च और लाल चंदन के साथ पीसकर, उसमें नारियल तेल मिलाकर मस्तिष्क पर लगाने से सिरदर्द से आराम मिलता है।
बालों का झड़ना कम करने में सहायक कंटोला, Benefits of Kantola in Hair loss
आजकल बालों के झड़ने की समस्या व्यापक रूप से प्रचलित हो गई है। स्त्री या पुरुष, सभी लोग बाल संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं, जैसे- असमय बालों का सफेद होना, रूसी, रूखे बाल, बालों का झड़ना, गंजापन आदि। बालों के झड़ने को कम करने के लिए कर्कोटकी जड़ को घिसकर बालों की जड़ों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं और बालों का झड़ना बंद हो जाता है।
कान दर्द में ककोरा के फायदे, Kantola Benefits to Get Relief from Ear Pain
यदि किसी रोग के साइड इफेक्ट के कारण कान में असहनीय दर्द हो गया है, तो कर्कोटकी जड़ को पीसकर घी में पकाकर, उसे छानकर, 1-2 बूंद कान में डालने से कान के दर्द से राहत मिलती है।
खांसी होने पर सांस संबंधी समस्याओं से दिलाये राहत काकरोल, Kantola Benefits in Cough
यदि खांसी ठीक नहीं हो रही है और खांसते समय सांस लेने में समस्या हो रही है, तो कंटोला (काकोड़ा) का उपयोग इस तरीके से करने से लाभकारी साबित हो सकता है।
• 2 ग्राम बांझ कंटोला कन्द का चूर्ण और 4 नग काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर गर्म पानी के साथ पीसकर दें और एक घंटे के बाद 1 गिलास दूध पिलाएं, जिससे कफ निसर्ग से बाहर निकलकर श्वास-कास में लाभ होता है।
• 1 ग्राम बांझ कंटोला कन्द (बल्ब) का चूर्ण गर्म पानी के साथ देकर खिलाने से खांसी से राहत मिलती है।
• कर्कोटकी जड़ की भस्म को 125 मिलीग्राम भस्म में 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच अदरक के रस के साथ मिलाकर खाने से खांसी होने पर सांस संबंधी समस्याओं में लाभ होता है।
जायफल (Nutmeg) के फायदे
पेट के इंफेक्शन में काकरोल का सेवन, Kantola Benefits in Stomach Infection
यदि खान-पान के कारण पेट में इंफेक्शन हो गया है, तो कर्कोटकी (ककोरा की सब्जी) का उपयोग इस तरीके से करने पर तेजी से राहत मिलती है। 1-2 ग्राम कर्कोटकी जड़ का चूर्ण सेवन करने से अरुचि और पेट की संक्रमण से त्वरित राहत मिलती है।
बवासीर से दिलाये राहत कंटोला, Kantola Benefits to Treat Piles
यदि खाने में ज्यादा मसालेदार और तीखा व्यंजनों का सेवन होता है, तो पाइल्स (अर्श) के विकार होने की संभावना बढ़ जाती है। उस समय, काकरोल (कंटोला सब्जी) एक अत्यंत उपयोगी घरेलू उपाय साबित हो सकता है। ककोड़ा जड़ को भूनकर, पीसकर, 500 मिग्राम की मात्रा में खिलाने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) से त्वरित राहत मिलती है।
पीलिया में काकरोल के फायदे, Spine Gourd Vegetable Benefits in Jaundice
यदि आपको पीलिया रोग हुआ है और आप इसके लक्षणों से परेशान हैं, तो कंटोला (कंटोला सब्जी) का सेवन निम्नलिखित तरीके से किया जा सकता है।
• कर्कोटकी के जड़ के रस को 1-2 बूंद नाक में टपकाने से पीलिया में लाभ होता है।
• बांझ ककोड़ा जड़ के चूर्ण को नाक से लेने से और गिलोय पत्ते को तक्र के साथ पीसकर पिलाने से पीलिया में लाभ होता है (दवाई लेने के समय आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए)।
बढ़े हुए प्लीहा (spleen) में कंटोला के फायदे, Kantola Benefits in Enlarged Spleen
अगर किसी बीमारी के कारण प्लीहा का आकार बढ़ गया है तो काकरोल (kakora ki sabji) का औषधीय गुण फायदेमंद साबित हो सकता है। 1-2 ग्राम बांझ ककोड़ा के जड़ के चूर्ण में 5 काली मरिच का चूर्ण मिलाकर शहद के साथ खाने से प्लीहा के बढ़ जाने पर उसका आकार कम होने में मदद मिलती है।
मूत्राश्मरी में कर्कोटकी के फायदे , Spine Gourd Vegetable Benefits in Urinary calculi
पुरुषों में मूत्राशय में पथरी की समस्या सबसे अधिक पाई जाती है। पथरी को निकालने में कंटोला (कंटोला सब्जी) का औषधीय गुण महत्वपूर्ण साबित होता है। 500 मिग्रा कर्कोटकी जड़ के सूक्ष्म चूर्ण को दस दिनों तक दूध के साथ सेवन करने से अश्मरी या पथरी टूटकर निकल जाती है।
डायबिटीज को कंट्रोल करने में सहायक कंटोला, Kantola Vegetable Benefits to Control Diabetes
आधुनिक असंतुलित जीवनशैली के दौरान डायबिटीज जैसे रोग बहुत आम हो गए हैं। इन रोगों को समय पर नियंत्रित न करने के कारण वे और भी कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं। 1-2 ग्राम कर्कोटकी जड़ के चूर्ण का सेवन करने से मधुमेह या डायबिटीज में लाभ हो सकता है।
दाद की परेशानी से दिलाये निजात काकरोल के फायदे, Kantola Benefits to Get Relief from Ringworm
आजकल चर्मरोग होने की आशंका बढ़ती जा रही है, उनमें से दाद एक है। दाद की खुजली की समस्या से छुटकारा पाने में सहायता करता है। कर्कोटकी के पत्ते के जूस में चार गुना तेल मिलाकर पका लें, ठंडा होने पर छानकर रख लें। इस तेल को लगाने से दाद, खुजली आदि त्वचा विकारों में लाभ (kantola vegetable benefits) होता है।
खुजली में ककोरा के फायदे, Kantola Beneficial in Scabies
आधुनिक प्रदूषण युक्त वातावरण में त्वचा संबंधी रोगों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हर व्यक्ति किसी न किसी त्वचा समस्या से पीड़ित है। काकरोल (कंट्रोला) का उपयोग खुजली के निवारण में मददगार साबित होता है। सुबह या ठंड के समय बढ़ती हुई खुजली में काकरोल के कन्द को पीसकर तेल के साथ मिलाकर उबटन की तरह लगाने से खुजली का समाधान होता है।
अपस्मार या लकवे में फायदेमंद कंटोला, Kantola Benefits in Paralysis
कंटोला वनस्पति के औषधीय गुण लकवे के रोग से राहत प्रदान करने में सहायता करते हैं। बांझ ककोड़ा की जड़ को घी के साथ पिसकर थोड़ी सी चीनी मिलाकर आच्छादित करें और 1-2 बूंद नाक में दें, तथा 1-2 ग्राम जड़ के पाउडर का सेवन करने से अपस्मार के रोग में लाभ प्राप्त होता है।
बुखार में ककोरा के फायदे, Benefits of Kantola to Treat Fever
यदि मौसम के परिवर्तन या किसी संक्रमण के कारण बुखार हो गया है, तो काकरोल (ककोरा सब्जी) बुखार के लक्षणों से आराम प्रदान करने में मदद करता है।
• कर्कोटक की पत्तियों की सब्जी का सेवन करने से ज्वर में लाभ होता है।
• कर्कोटक की जड़ को पीसकर शरीर पर लेप करने से बुखार से राहत मिलती है।
गर्भावस्था के लक्षण
सूजन में फायदेमंद कर्कोटकी, Benefits of Kantola in Fever
यदि किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के कारण शरीर के किसी अंग में सूजन हो गई है, तो उस स्थान पर कंटोला (काकरोल सब्जी) का उपयोग करना लाभदायक होता है। ककोड़ा कंद का चूर्ण गर्म जल में पीसकर सूजन वाले स्थान पर लगाने से सूजन कम होती है।
सन्निपात या बेहोशी में कंटोला के फायदे, Benefits of Kakrol in Delirium
काकरोल (कांटोला सब्जी) का औषधीय गुण बेहोशी से होश लाने में सहायता प्रदान करता है। बांझ ककोड़ा के कंद का चूर्ण तैयार करके उसमें कुलथी, पीपल, वच, कायफल और काला जीरा को पीसकर मिलाकर शरीर पर मालिश करने से लाभ होता है।
सांप के काटने पर कंटोला का प्रयोग, Use of Kantola in Snake Bite
कर्किटकी के जड़ को पीसकर सर्प के काटे हुए स्थान पर लगाने से दर्द और जलन आदि से आराम प्राप्त होता है।
आंखों के लिए ककोरा के फायदे, Benefits of Kakora for Eyes
काकोरा का सेवन आंखों के लिए फायदेमंद होता है, विशेष रूप से एलर्जी की स्थिति में, क्योंकि काकोरा में एंटी-एलर्जिक गुण पाया जाता है। इसलिए, यदि आप आंखों में एलर्जी की समस्या से पीड़ित हैं, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार काकोरा का सेवन करें।
कैंसर को रोकने में सहायक है ककोरा, Kantola helps in Treatment of Cancer
विशेषज्ञों के अनुसार काकोरा में एंटीकैंसरीय गुण पाए जाते हैं और इसलिए इसके सेवन से कैंसर होने की संभावना कम होती है। यह मौजूद एंटीकैंसरीय गुण शरीर में कैंसर के फैलने को भी रोकने में मदद करते हैं।
ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने में मददगार है ककोरा, Kantola Benefits for Controling Blood Pressure
यदि आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित हैं, तो काकोरा की सब्जी या ताजा जूस आपके लिए उपयोगी हो सकता है। काकोरा में पाये जाने वाले एंटीहाइपरटेंसिव गुण हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
कर्कोटकी के उपयोगी भाग, Useful Parts of Kantola
आयुर्वेद में कर्कोटकी की जड़ और पके फल को औषधि के रूप में अधिक प्रयोग किया जाता है।
FAQs
Kantola क्या है और इसकी पहचान कैसे की जाती है?
Kantola एक सब्जी है जो टोरी के रूप में भी जानी जाती है। यह हरी सब्जी होती है जिसकी ताजगी और खसकर कच्ची अवस्था में उपयोग किया जाता है।
Kantola को खाने के लिए कैसे तैयार किया जाता है?
Kantola को काटकर, तलकर या अन्य व्यंजनों में उपयोग करके तैयार किया जाता है। यह मसालेदार, मीठा और तीखा स्वाद देता है और इसकी टेक्सचर क्रिस्पी होती है।
Kantola का स्वाद कैसा होता है?
Kantola का स्वाद तीखा और क्रिस्पी होता है। यह मसालेदार और मीठा स्वाद देता है जो इसे खाने में स्वादिष्ट बनाता है।
Kantola के स्वास्थ्य लाभ क्या-क्या हो सकते हैं?
Kantola में विटामिन C, विटामिन A, फोलिक एसिड, कैल्शियम, और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसका सेवन पाचन को सुधारता है, रक्तचाप को नियंत्रित करता है, वजन को नियंत्रित करता है और शारीरिक संरक्षण को बढ़ावा देता है।
Kantola को किस प्रकार सेवन किया जाता है?
Kantola को कच्चा, तला हुआ, या भुना हुआ रूप में सेवन किया जा सकता है। इसे सब्जी के रूप में प्रिफर प्याज, टमाटर, और मसालों के साथ पकाकर बनाया जा सकता है।
Kantola की खेती की जानकारी और उत्पादन?
Kantola की खेती के लिए उचित जलवायु, उपयुक्त मिट्टी, और आवश्यक कृषि तकनीकों की आवश्यकता होती है। इसे बागवानी या खेती के लिए उत्पादित किया जाता है।
Kantola के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य और विशेषताएं?
Kantola एक छोटा सब्जीपालक पौधा होता है जिसके ताजगी और खसकर तंगे दिखते हैं। इसकी खेती गर्म मौसम में की जाती है और यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है।
Kantola के संग्रहण और रखरखाव के लिए सुझाव?
Kantola को स्वच्छ, सुखी और ठंडे स्थान पर रखें। इसे पानी से संवारित रखें और ज्यादा समय तक स्टोर न करें।
Kantola की प्रमुख प्रजातियां और उनकी विशेषताएं?
Kantola की प्रमुख प्रजातियां शीवरी, रिबड, और गौचार होती हैं। इनमें स्वाद और आकार में थोड़ी अंतर हो सकता है।
Kantola के बदले में अन्य वृक्षीय सब्जियाँ का उपयोग किया जा सकता है?
Kantola के बदले में तुरई, टोरी, टिंडा, और कुम्रा जैसी अन्य वृक्षीय सब्जियाँ उपयोग की जा सकती हैं। ये विकल्पी सब्जियाँ आपके पर्याप्त रूप से बदल सकती हैं।
2 thoughts on “Kantola: दुनिया की शक्तिशाली सब्जी, कुछ दिनों के खाने से शरीर में जबरदस्त चमत्कार दिखेगा”